किष्किन्धाकाण्ड

भाग-१(1) पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता 

भाग-२(2) श्रीराम का लक्ष्मण से पम्पा की शोभा तथा वहाँ की उद्दीपन सामग्री का वर्णन करना 

भाग-३(3) लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना तथा दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना

भाग-४(4) सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमानजी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमानजी को श्रीराम- लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना

भाग-५(5) हनुमानजी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना, श्रीराम का उनके वचनों की प्रशंसा करके लक्ष्मण को अपनी ओर से बात करने की आज्ञा देना 

भाग-६(6) लक्ष्मण का हनुमानजी से श्रीराम के वन में आने और सीताजी के हरे जाने का वृत्तान्त बताना तथा हनुमानजी का उन्हें आश्वासन देकर उन दोनों भाइयों को अपने साथ ले जाना

भाग-७(7) श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा बालि वध की प्रतिज्ञा

भाग-८(8) सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन

भाग-९(9) सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना

भाग-१०(10) सुग्रीव का श्रीराम से अपना दु:ख निवेदन करना और श्रीराम का उन्हें आश्वासन देते हुए दोनों भाइयों में वैर होने का कारण पूछना

भाग-११(11) सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को वाली के साथ अपने वैर होने का कारण बताना

भाग-१२(12) भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना

भाग-१३(13) सुग्रीव के द्वारा वाली के पराक्रम का वर्णन - मतङ्ग मुनि का वाली को शाप देना, श्रीराम का दुन्दुभि के अस्थि समूह को दूर फेंकना और सुग्रीव का उनसे साल-भेदन के लिये आग्रह करना

भाग-१४(14) श्रीराम के द्वारा सात साल वृक्षों का भेदन, श्रीराम की आज्ञा से सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में उससे पराजित होकर मतंगवन में भाग जाना 

भाग-१५(15) श्रीराम आदि का पुन: किष्किन्धा पुरी में पहुँचना

भाग-१६(16) वाली - वध के लिये श्रीराम का आश्वासन पाकर सुग्रीव की विकट गर्जना, सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना

भाग-१७(17) वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना तथा वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना

भाग-१८(18) श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना, वाली का निरुत्तर होकर भगवान से अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे आश्वासन देना

भाग-१९(19) अङ्गद सहित तारा का वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना,  हनुमानजी का तारा को समझाना 

भाग-२०(20) बाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना तथा तारा का विलाप

भाग-२१(21) सुग्रीव का शोक मग्न होकर श्रीराम से प्राण त्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना, अङ्गद के द्वारा वाली का दाह संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना

भाग-२२(22) सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक, प्रस्रवण गिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत

भाग-२३(23) श्रीराम के द्वारा वर्षा ऋतु का वर्णन

भाग-२४(24) हनुमानजी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना, शरद् ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना

भाग-२५ (25) सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना तथा हनुमानजी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना

भाग-२६(26) लक्ष्मण का किष्किन्धा पुरी की शोभा देखते हुए सुग्रीव के महल में प्रवेश करके क्रोध पूर्वक धनुष को टंकारना, भयभीत सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्त: पुर में ले आना

भाग-२७(27) तारा का लक्ष्मण को युक्तियुक्त वचनों द्वारा शान्त करना, सुग्रीव का लक्ष्मण से क्षमा माँगना और राजा की आज्ञा सुनकर समस्त वानरों का किष्किन्धा के लिये प्रस्थान

भाग-२८(28) लक्ष्मण सहित सुग्रीव का भगवान् श्रीराम के पास आकर उनके चरणों में प्रणाम करना, श्रीरामचन्द्रजी का सुग्रीव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तथा विभिन्न वानर- यूथपतियों का अपनी सेनाओं के साथ आगमन

भाग-२९(29) श्रीराम की आज्ञा से सुग्रीव का सीता की खोज के लिये पूर्व दिशा में वानरों को भेजना और वहाँ के स्थानों का वर्णन करना

भाग-३०(30) सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना



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