भाग-१(1) पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता
भाग-२(2) श्रीराम का लक्ष्मण से पम्पा की शोभा तथा वहाँ की उद्दीपन सामग्री का वर्णन करना
भाग-७(7) श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा श्रीराम द्वारा बालि वध की प्रतिज्ञा
भाग-८(8) सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन
भाग-९(9) सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना
भाग-११(11) सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को वाली के साथ अपने वैर होने का कारण बताना
भाग-१५(15) श्रीराम आदि का पुन: किष्किन्धा पुरी में पहुँचना
भाग-२०(20) बाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना तथा तारा का विलाप
भाग-२२(22) सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक, प्रस्रवण गिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत
भाग-२३(23) श्रीराम के द्वारा वर्षा ऋतु का वर्णन
भाग-३०(30) सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना
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