भाग-१(1) वृद्ध कुलपति सहित बहुत-से ऋषियों का चित्रकूट छोड़कर दूसरे आश्रम में जाना
भाग-२(2) श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार
भाग-३(3) सीता - अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना
भाग-४(4) अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना तथा श्रीराम आदि का रात्रि में आश्रम पर रहकर प्रात: काल अन्यत्र जाने के लिये ऋषियों से विदा लेना
भाग-५(5) श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का तापसों के आश्रम मण्डल में सत्कार, वन के भीतर श्रीराम, लक्ष्मण और सीता पर विराध का आक्रमण
भाग-६(6) विराध और श्रीराम की बातचीत, श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा विराध पर प्रहार तथा श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा विराध का वध
भाग-७(7) श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का शरभङ्ग मुनि के आश्रम पर जाना, देवताओं का दर्शन करना और मुनि से सम्मानित होना तथा शरभङ्ग मुनि का ब्रह्मलोक-गमन
भाग-८(8) वानप्रस्थ मुनियों का राक्षसों के अत्याचार से अपनी रक्षा के लिये श्रीरामचन्द्रजी से प्रार्थना करना और श्रीराम का उन्हें आश्वासन देना
भाग-९(9) सीता और भ्राता सहित श्रीराम का सुतीक्ष्ण के आश्रम पर जाकर उनसे बातचीत करना, उनसे सत्कृत हो रात में वहीं ठहरना तथा प्रात:काल सुतीक्ष्ण से विदा ले श्रीराम, लक्ष्मण, सीता का वहाँ से प्रस्थान
भाग-१०(10) सीता का श्रीराम से निरपराध प्राणियों को न मारने और अहिंसा-धर्म का पालन करने के लिये अनुरोध
भाग-११(11) श्रीराम का ऋषियों की रक्षा के लिये राक्षसों के वध के निमित्त की हुई प्रतिज्ञा के पालन पर दृढ़ रहने का विचार प्रकट करना
भाग-१२(12) पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना
भाग-१३(13) सुतीक्ष्ण के आश्रम में कुछ काल तक रहकर उनकी आज्ञा से अगस्त्य के भाई तथा अगस्त्य के आश्रम पर जाना
भाग-१४(14) श्रीराम द्वारा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन
भाग-१५(15) श्रीराम आदि का अगस्त्य के आश्रम में प्रवेश, अतिथि सत्कार तथा मुनि की ओर से उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति, श्रीराम के पूछने पर उन्हें पञ्चवटी में आश्रम बनाकर रहने का आदेश देना
भाग-१६(16) पञ्चवटी के मार्ग में जटायु का मिलना और श्रीराम को अपना विस्तृत परिचय देना
भाग-१७(17) पञ्चवटी के रमणीय प्रदेश में श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा सुन्दर पर्णशाला का निर्माण तथा उसमें सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का निवास
भाग-१८(18) लक्ष्मण के द्वारा हेमन्त ऋतु का वर्णन और भरत की प्रशंसा तथा श्रीराम का उन दोनों के साथ गोदावरी नदी में स्नान
भाग-१९(19) श्रीराम के आश्रम में शूर्पणखा का आना, उनसे अपने को भार्या के रूप में ग्रहण करने के लिये अनुरोध करना, टालने पर उसका सीता पर आक्रमण और लक्ष्मण का उसके नाक-कान काट लेना
भाग-२०(20) शूर्पणखा के मुख से उसकी दुर्दशा का वृत्तान्त सुनकर क्रोध में भरे हुए खर का श्रीराम आदि के वध के लिये चौदह राक्षसों को भेजना, श्रीराम द्वारा उन सभी चौदह राक्षसों का वध
भाग-२१(21) शूर्पणखा का खर के पास आकर उन राक्षसों के वध का समाचार बताना और राम का भय दिखाकर उसे युद्ध के लिये उत्तेजित करना तथा चौदह हजार राक्षसों की सेना के साथ खर-दूषण का जनस्थान से पञ्चवटी की ओर प्रस्थान
भाग-२२(22) भयंकर उत्पातों को देखकर भी खर का उनकी परवाह नहीं करना तथा राक्षस-सेना का श्रीराम के आश्रम के समीप पहुँचना
No comments:
Post a Comment