भाग-९४(94) श्रीराम का भरत को कुशल प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना
भाग-१०१(101) चित्रकूट में जनकजी का पहुँचना, कोल किरातादि की भेंट, सबका परस्पर मिलाप
भाग-१०२(102) कौशल्या सुनयना-संवाद, श्री सीताजी का शील स्वभाव
भाग-१०५ (105) भरत की पुन: श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना
भाग-१०७(107) श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन
भाग-१११(111) भरत का चित्रकूट में तीर्थ जल स्थापन तथा तीर्थ की भरत कूप नाम से प्रसिद्धि
भाग-११३(113) भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना
॥ अयोध्याकाण्ड समाप्त ॥
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