भाग-६६(66) भरत का कैकेयी के भवन में जाकर उसे प्रणाम करना, उसके द्वारा पिता के परलोकवास का समाचार पा दु:खी हो विलाप करना तथा श्रीराम के विषय में पूछने पर कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना
भाग-६७(67) भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना
भाग-६८(68) भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना
भाग-६९(69) कौशल्या के सामने भरत का शपथ खाना
भाग-७०(70) राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार
भाग-७१(71) भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान देना, तेरहवें दिन अस्थि-संचय का शेष कार्य पूर्ण करना
भाग-७२(72) शत्रुघ्न का रोष, उनका कुब्जा को घसीटना और भरतजी के कहने से उसे मूर्च्छित अवस्था में छोड़ देना
भाग-७३(73) मन्त्री आदि का भरत से राज्य ग्रहण करने के लिये प्रस्ताव तथा भरत का अभिषेक सामग्री की परिक्रमा करके श्रीराम को ही राज्य का अधिकारी बताकर उन्हें लौटा लाने के लिये चलने के निमित्त व्यवस्था करने की सबको आज्ञा देना
भाग-७४(74) वशिष्ठजी का सभा में आकर मन्त्री आदि को बुलाने के लिये दूत भेजना, वशिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना
भाग-७५(75) वशिष्ठजी की राज्य ग्रहण करने की आज्ञा को भरत का उसे अनुचित बताकर अस्वीकार करना
भाग-७६(76) भरतजी की आज्ञा से अयोध्यावासियों का श्रीराम को लौटने निमित्त तैयारी करना
भाग-७७(77) भरत की वनयात्रा और श्रृङ्गवेरपुर में रात्रिवास
भाग-७८(78) निषादराज गुह का अपने बन्धुओं को नदी की रक्षा करते हुए युद्ध के लिये तैयार रहने का आदेश देना
भाग-७९(79) निषादराज गुह का भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना
भाग-८०(80) निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन
भाग-८१(81) भरत का गुह से श्रीराम आदि के भोजन और शयन आदि के विषय में पूछना और गुह का उन्हें सब बातें बताना
भाग-८२(82) श्रीराम की कुश-शय्या देखकर भरत का शोकपूर्ण उद्गार तथा स्वयं भी वल्कल और जटाधारण करके वन में रहने का विचार प्रकट करना
भाग-८३(83) भरत का सेना सहित गङ्गापार करके भरद्वाज के आश्रम पर जाना
भाग-८४(84) भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना
भाग-८५(85) भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार
भाग-८६(86) भरत का भरद्वाज मुनि से जाने की आज्ञा लेते हुए श्रीराम के आश्रम पर जाने का मार्ग जानना और वहाँ से चित्रकूट के लिये सेना सहित प्रस्थान करना
भाग-८७(87) इंद्र-बृहस्पतिजी संवाद तथा भरतजी चित्रकूट के मार्ग में
भाग-८८(88) सेना सहित भरत की चित्रकूट यात्रा का वर्णन
भाग-८९(89) श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना
भाग-९०(90) श्रीराम का सीता के प्रति मन्दाकिनी नदी की शोभा का वर्णन
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